विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का किडनी ट्रांसप्लांट सफल रहा, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी है. बताया जाता है कि सुषमा स्वराज ने पहले ही परिवार और डॉक्टरों से विचार-विमर्श करने के बाद प्रधानमंत्री को विदेश मंत्रालय छोड़ने की अपनी इच्छा बता दी थी. इसलिए अब बीच का रास्ता निकाला जा रहा है. सुषमा बिना किसी विभाग के मोदी सरकार में मंत्री बनी रहेंगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नया विदेश मंत्री ढूंढेंगे. लेकिन सुषमा स्वराज जैसा विदेश मंत्री ढूंढना इतना आसान काम तो है नहीं. वे सोशल मीडिया से लेकर विदेशी मीडिया मैनेज करने तक, कूटनीति से लेकर राजनीति तक, सब में माहिर हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री के पास चार विकल्प हैं:
राजनीति के गलियारों में आज कल नरेंद्र मोदी का सामने मौजूद पहले विकल्प की सबसे ज्यादा चर्चा है. लेकिन इस पर कोई फैसला करना उतना ही ज्यादा मुश्किल है. भाजपा के भीतर वित्त मंत्री अरुण जेटली को नया विदेश मंत्री बनाने की बात चल रही है. खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नोटबंदी के मुश्किल वक्त में अरुण जेटली के काम करने के तरीके से बहुत खुश नहीं हैं. पीएमओ के अफसरों की राय है कि प्रधानमंत्री ने एक अच्छा फैसला लिया था लेकिन अगर इसे बुरे तरीके से लागू किया गया तो इसकी जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय की है.
नए वित्त मंत्री के तौर पर जिस व्यक्ति का नाम सबसे आगे चल रहा है, वह हैं ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल. वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के भी बेहद करीबी हैं
लेकिन अरुण जेटली को विदेश मंत्री बनाने की राह की सबसे बड़ी अड़चन यह है कि इस बार बजट फरवरी के बजाय जनवरी में ही आने वाला है. ऊपर से इस बार रेल बजट भी उसी का हिस्सा होगा. इसलिए वित्त मंत्रालय में अभी से बजट की तैयारी बहुत तेजी से चल रही है. इस तैयारी के बीच वित्त मंत्री को हटाना बेहद मुश्किल फैसला है. लेकिन जो लोग जेटली को वित्त मंत्रालय से हटाकर विदेश मंत्रालय में भेजना चाहते हैं उनका कहना है कि बजट की रूपरेखा करीब-करीब तय हो चुकी है. आगे का काम नया वित्त मंत्री आसानी से संभाल लेगा.
नए वित्त मंत्री के तौर पर जिस व्यक्ति का नाम सबसे आगे चल रहा है, वे हैं ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल. पीयूष पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं. वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के भी बेहद करीबी हैं. प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के ही हस्तक्षेप के बाद ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल को नोटबंदी के फायदे बताने के लिए हर मंच पर भेजा गया. पीयूष गोयल की बस एक ही दिक्कत है. सियासत में तजुर्बे के हिसाब से वे अब भी अपेक्षाकृत जूनियर माने जाते हैं. इस वक्त भी मोदी सरकार में वे कैबिनेट मंत्री नहीं हैं.
नए विदेश मंत्री के तौर पर दूसरा नाम कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का चल रहा है. जब से मोदी सरकार बनी है तब से ही वे विदेश मंत्री बनना चाहते हैं. पिछले ढाई साल में उन्होंने यह बात बहुत ज्यादा छिपाई भी नहीं. विदेश मंत्री बनते ही रविशंकर प्रसाद सरकार के शीर्ष छह मंत्रियों में शुमार हो जाएंगे. ताकतवर कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी में भी उन्हें जगह मिल जाएगी. लेकिन रविशंकर प्रसाद को नया विदेश मंत्री बनाने का मतलब है एक नया कानून मंत्री ढूंढना. पिछले ढाई साल में कानून मंत्रालय ने तीन मंत्री देख लिए हैं.
एक तीसरा नाम और है जिस पर अभी तक किसी की ज्यादा नजर नहीं गई है - विदेश सचिव एस जयशंकर. वे अगले साल 28 जनवरी को रिटायर हो रहे हैं
पूर्व मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी फिलहाल कपड़ा मंत्री हैं, और विवादों से भी दूर हैं. आरएसएस के कुछ वरिष्ठ लोग चाहते हैं कि स्मृति ईरानी का वनवास अब खत्म किया जाए और उन्हें विदेश मंत्री बना दिया जाए. स्मृति ईरानी के पक्ष में जो बात जाती है वह यह है कि वे अंग्रेजी और हिंदी, दोनों की अच्छी वक्ता हैं. सुषमा स्वराज ने सोशल मीडिया के जरिए विदेश मंत्रालय को बहुत गुडविल दिलाई. स्मृति ईरानी भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल बहुत ज्यादा करती हैं. कपड़ा मंत्री रहते हुए भी उन्होंने अपने मंत्रालय के सभी कैंपेन सोशल मीडिया के जरिए ही चलाए जिनमें से कई ट्विटर पर ट्रेंड भी करते रहे. लेकिन स्मृति की अपनी कमजोरी है. विदेश मंत्रालय में राजनीति बहुत कम और कूटनीति बहुत ज्यादा चलती है. देश हो या परदेस विदेश मंत्री को हर वक्त बहुत संभलकर बोलना होता है, स्मृति ईरानी के विरोधी कहते हैं कि यह काम उनसे नहीं होगा. इसलिए अभी विदेश मंत्री जैसा संवेदनशील मंत्रालय उन्हें नहीं दिया जा सकता.
चौथा और आखिरी विकल्प है कि विदेश मंत्रालय फिलहाल प्रधानमंत्री अपने पास रखें. इस सूरत में प्रधानमंत्री को अपने भरोसे का विदेश राज्यमंत्री चाहिए. इस वक्त विदेश मंत्रालय में वीके सिंह और एमजे अकबर दो राज्यमंत्री हैं. वीके सिंह अपने बयानों की वजह से सुर्खियां बटोरने में पीछे नहीं रहते और एमजे अकबर को अभी मोदी का भरोसेमंद कहना थोड़ी जल्दबाजी होगी. एक तीसरा नाम और है जिस पर अभी तक किसी की ज्यादा नजर नहीं गई है - विदेश सचिव एस जयशंकर. वे अगले साल 28 जनवरी को रिटायर हो रहे हैं. जयशंकर, मोदी के सबसे पसंदीदा अफसरों में से एक हैं.
कहा जाता है कि इस वक्त तीन लोग विदेश मंत्रालय चला रहे हैं – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और विदेश सचिव एस जयशंकर. खबर है कि प्रधानमंत्री एस जयशंकर को विदेश मंत्रालय से बाहर नहीं जाने देंगे. उन्हें या तो विदेश सचिव के तौर पर एक्सटेंशन मिलेगा या फिर अगर प्रधानमंत्री ने चाहा तो वे अपने सबसे चहेते अफसर को विदेश राज्यमंत्री तक बना सकते हैं. बस एक दिक्कत है विदेश राज्यमंत्री बनने का मतलब हुआ शशि थरूर की तरह एक डिप्लोमेट का सियासत में प्रवेश. एस जयशंकर सियासत से दूर रहना चाहते हैं. वो विदेश राज्यमंत्री नहीं अगले दो साल तक विदेश सचिव ही बने रहना चाहते हैं. इसलिए हो सकता है कि पीयूष गोयल को कैबिनेट मंत्री बनाने के बजाय राज्यमंत्री रहते हुए ही वित्त मंत्रालय चलाने की जिम्मेदारी दे दी जाए.
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