बीते शुक्रवार सलमान खान की फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ रिलीज हुई. बॉक्स ऑफिस के जानकार बताते हैं कि करीब डेढ़ सौ करोड़ रु की लागत से बनी इस फिल्म ने पहले ही हफ्ते में इतनी कमाई कर ली है. बीते साल इन्हीं दिनों आमिर खान की ‘दंगल’ रिलीज हुई थी और उससे कुछ ही वक्त पहले सलमान खान की ‘सुल्तान.’ दोनों फिल्में कुश्ती पर आधारित होने के अलावा बॉलीवुड के दो सबसे बड़े सितारों की भी फिल्में हैं और इस वजह से भी उनका साथ-साथ जिक्र और उनकी तुलना होना स्वाभाविक है.
इससे कुछ समय पहले तक जब तीनों खानों या तीन में से दो खानों की आपस में तुलना की जा रही होती थी तो उसका रुख एकतरफा होता था. अभिनय के मामले में सारा श्रेय आमिर ले जाते थे और स्टारडम की चमक शाहरुख के खाते में चली जाती थी. किंग खान के बारे में कहा जाता है कि स्क्रीन पर शाहरुख खान, शाहरुख खान बनकर ही शोभते हैं. उन्हें अभिनय करने की जरूरत सबसे कम है. इसके ठीक उलट आमिर की बारी आते ही अभिनय ही सबकुछ हो जाता है, अपने पूरे परफेक्शन के साथ. इनके बीच में कहीं संतुलन की स्थिति से दो-चार पायदान ऊपर सलमान खान को रखा जाता था. उनके बारे में कहा जाता था कि उनका आभामंडल शाहरुख खान जैसा नहीं हैं और प्रतिभा के मामले में वे आमिर खान के आगे नहीं ठहरते.
लेकिन पिछले कुछ समय से स्थितियां बदलती नजर आ रही हैं. अब वे शाहरुख से ज्यादा बड़े, चमकीले और बिकने वाले स्टार हैं और अभिनय के मामले में भी ऐसा लगता है कि कुछ ठानकर ही बैठे हुए हैं.
आमिर जहां सही लहजे और उच्चारण का ध्यान रखते-रखते दंगल में कई बार बनावटी लगने लगते हैं. वहीं सलमान खान उस भाषा का रंग समझ कर उसे अपने ही अंदाज में बोलते नजर आते हैं
‘टाइगर जिंदा है’ के सलमान खान के बारे में कहा जा रहा है कि वे अपनी भाई वाली छवि भुनाकर बिना अभिनय किए एक बार फिर काम चला लेना चाहते हैं. हालांकि इसके पहले आई फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ में सलमान ने अभिनय करने की भरपूर कोशिश की थी. कुछ लोगों का कहना है कि दर्शकों को वह अभिनय उतना पसंद नहीं आया इसीलिए वे टाइगर बनकर एक बार फिर पुराने वाले मोड में चले गए हैं. लेकिन अगर ‘सुल्तान’ वाले सलमान खान की बात की जाए तो वे इस भूमिका में वे आमिर खान की टक्कर का अभिनय शाहरुख वाले एटीट्यूड के साथ करते नजर आए थे. आमिर ने दंगल की तैयारी अपने तरीके से की थी और जिम में खूब पसीना बहाया जबकि फिल्म में वे नाममात्र को ही दंगल लड़ते दिखाई दिए थे. सलमान ने भी अपनी प्रकृति से उलट सुल्तान बनने के लिए करीब दो महीने तक कुश्ती की ट्रेनिंग ली. लेकिन आमिर के उलट वे फिल्म में जमकर कुश्ती करते नजर आए, वह भी पूरी विश्वसनीयता के साथ. स्क्रीन पर सुल्तान कुश्ती लड़ते हुए महावीर सिंह फोगट (दंगल में आमिर का पात्र) की तुलना में परफेक्शन और स्टाइल दोनों को बराबर साधता दिखा. फिल्म में अपने विरोधी पहलवानों को चारों खाने चित करने के बाद सलमान जिस अंदाज में हाथ जोड़कर उससे माफी मांगते थे, वह उनके दर्शकों, प्रशंसकों और आलोचकों को भी चित करने वाला था.
ये दोनों ही फिल्में हरियाणा की पृष्ठभूमि पर बनी थीं. हरियाणवी किरदारों की भाषा अक्सर कलाकारों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर पेश आती है. इस चुनौती से निपटने का तरीका भी दोनों कलाकारों के बारे में बहुत कुछ बता जाता है: आमिर जहां सही लहजे और उच्चारण का ध्यान रखते-रखते दंगल में कई बार बनावटी लगे. वहीं सलमान खान उस भाषा का रंग समझ कर उसे अपने ही अंदाज में बोलते नजर आए, मानो कह रहे हों भई इससे ज्यादा मेहनत मुझसे न होगी. लेकिन ऐसा करने की वजह से उनका अभिनय कई बार आमिर के मुकाबले ज्यादा सहज नजर आया.
दंगल और सुल्तान इन दोनों सितारों के आगे के करियर का रास्ता बनाने वाली फिल्में रहीं. आमिर खान हां इस बार भी अपने पाले में रहे हैं इसलिए कह सकते हैं कि सुरक्षित खेले हैं. उन्होंने हर चीज को वैसा ही रखा है जैसा उसे होना चाहिए. जबकि सलमान ने भरपूर रिस्क लिया है. सुल्तान में एक दृश्य है जिसमें वे शर्टलेस नजर आते हैं. इसमें वे अपने एब्स नहीं बल्कि अपनी प्रोस्थेटिक (नकली) तोंद दिखा रहे हैं. वे यह बात बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि निर्देशक भले ही स्क्रीन पर कोई बेडौल शरीर वाला एक अधेड़ उम्र का मजबूर पात्र दिखाना चाह रहा हो लेकिन उनके प्रशंसकों के लिए वह सलमान खान ही रहेगा. यह दृश्य न सिर्फ अभिनय के लिहाज से बेहतरीन है बल्कि उनके जैसी लोकप्रियता रखने वाले कलाकार के लिए नकली तोंद में नजर आना भी हिम्मत का काम है. सैकड़ों फैन्स के लिए आज भी जिम जाने की वजह सलमान जैसी बॉडी की चाह है.
यह बात उनकी अगली फिल्म ट्यूबलाइट पर भी लागू की जा सकती है जब वे एक बालकबुद्धि वयस्क किरदार करते नजर आए थे. स्क्रिप्ट की डिमांड पर भी इस तरह की भूमिकाएं करना किसी को भी उनकी ऐसी छवि के लिए खतरा लग सकता है और सलमान अब ये खतरा उठाने लगे हैं. सुल्तान और ट्यूबलाइट के बाद अपने उन प्रशंसकों के लिए वे एक बार फिर टाइगर बन जाते हैं, जो उन्हें दांतो तले उंगली दबा लेने वाले कारनामें करते देखना चाहते हैं. बीते दो सालों में आई सलमान की फिल्में बताती है कि वे आलोचकों, आम दर्शकों और दर्शकों में ही शामिल अपने प्रशंसकों तीनों को खुश करने के लिए नई-नई भूमिकाओं में नजर आते रहेंगे.
साल 2015 में जब तीनों खान पचास की उम्र का आंकड़ा छू रहे थे. तब ज्यादातर प्रशंसक और समीक्षक इस बात का अंदाजा लगाते नजर आ रहे थे कि बढ़ती उम्र का असर खान सितारों की स्किन से लेकर स्क्रीन तक पर कितना नजर आने वाला है. 2016 में यह दिखा भी. आमिर जहां दंगल में पिता की भूमिका में नजर आ रहे हैं वहीं शाहरुख डियर जिंदगी के जरिए मार्गदर्शक वाली राह पकड़ चुके हैं. ठीक उसी वक्त सुल्तान के जरिए सलमान दर्शकों को बिना अपच करवाए अपने से लगभग आधी उम्र की हीरोइन के साथ रोमांस कर रहे थे और अपनी उमर से न्याय करते नायक भी बने रहे. 2017 कहता है कि सलमान अपने इन रूपों के साथ भाई यानी एक्शन हीरो वाली छवि भी बनाए रखने की पूरी कोशिश करते रहेंगे. यह बताता है कि वे हर बार सही वक्त पर सही मोड़ पर मुड़े हैं.
तीनों सितारों की आखिरी पांच फिल्मों के कमाई के आंकड़े अगर देखे जाएं तो सलमान की फिल्मों से अब तक इंडस्ट्री को लगभग एक हजार करोड़ की कमाई हुई है
तीनो खानों के बारे में यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि इनमें से कोई भी अभिनय की अकूत क्षमताओं से भरा हुआ नहीं है. लेकिन ये अपने-अपने खानों में जरूर फिट बैठते हैं. सीमित अभिनय क्षमता को जहां शाहरुख ने अपने चार्म से ढका वहीं आमिर खान उसे कम काम की वजह से संभव हो सकने वाले परफेक्शन से बदलते नजर आये. ये दोनों सालों से ऐसा करते चले आ रहे हैं. सलमान इसके लिए लगातार बदलाव का सहारा लेते रहे हैं. वे एक ऐसा सितारा हैं जो एक चलन शुरू करते हैं तो वह तब तक नहीं बदलता जब तक वे खुद ही उसे न बदल दें. फिर चाहे वह तेरे नाम के राधे जैसे बाल कटाने का चलन हो या दबंग की तरह बेल्ट हिलाकर हुड़-हुड़ दबंग गाने का. और जब प्रेम की भूमिका में वे बार-बार खुद को दोहराते हैं तो दर्शक उनके सिवाय किसी और का प्रेम स्वीकार करने से इंकार कर देते हैं.
आईएमडीबी रैंकिंग में भले ही सलमान की फ़िल्में कमतर कही जाएं लेकिन कमाई के लिहाज से उनके बारे में इस तरह का कुछ सोचना भी संभव नहीं है. इसे इस तरह से भी देख सकते हैं कि आमिर खान जहां औसतन एक से डेढ़ साल में एक फिल्म में नजर आते हैं वहीं इतने ही समय में सलमान की दो फ़िल्में आकर जबर्दस्त हिट हो चुकी होती हैं. तीनों सितारों की आखिरी पांच फिल्मों के कमाई के आंकड़े अगर देखे जाएं तो सलमान की फिल्मों से अब तक इंडस्ट्री को लगभग एक हजार करोड़ की कमाई हुई है जबकि बाकी दोनों सितारों के लिए यह आंकड़ा लगभग सात सौ करोड़ रुपए ही है. जबकि सलमान ने कम से कम आमिर के मुकाबले ये फिल्में काफी कम समय में की थीं. शाहरुख इस सूची में गिने जाकर भी इसलिए उस तरह से शामिल नहीं होते क्योंकि वे खुद हिट फिल्म की गारंटी नहीं देते हैं. इस मामले में उनका कहना है कि वे एक ही वक्त पर एक फिल्म तन के लिए, एक मन के लिए और एक धन के लिए करना पसंद करते हैं.
मीडिया और दर्शकों ने सलमान से जुड़े विवादों में भी उनकी फिल्मों जितनी ही दिलचस्पी ली है. वे भी अपनी सिनेमाई और निजी जिंदगी में बदी, बदनामी और बदकिस्मती के शिकार रहे. लेकिन जब भी उन्होंने असफलता का नजारा देखा या आलोचना के स्वर सुने, हर बार एक नया सलमान सामने आ खड़ा हुआ है. यह सिलसिला बीइंग ह्यूमन से लेकर बजरंगी भाईजान और अब टाइगर जिंदा है तक जारी है. बदलाव के इस सिलसिले ने दुनिया को वह सलमान दिया है जिसके पीछे सफलता और शोहरत दोनों ही दीवानों की तरह भागती हुई चली आती है. इस वजह से भी वे सही मायनों में एक सितारा हैं.
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