26 मई को नरेंद्र मोदी सरकार के तीन साल पूरे हो रहे हैं. तीन साल पूरा होने पर हर मंत्रालय अपना रिपोर्ट कार्ड जारी कर रहा है. इसमें बताया जा रहा है कि इन तीन सालों में क्या-क्या हुआ है और आगे के लिए क्या कार्ययोजना है. इसके अलावा पूरी सरकार की उपलब्धियों का बखान करने में सरकारी मशीनरी समेत सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल लगे हुए हैं. इस सबके बीच इन तीन सालों में कुछ ऐसे मंत्रालयों का कामकाज देखना प्रासंगिक है जिनका प्रदर्शन सबसे अच्छा दिख रहा है.
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
इस मंत्रालय का जिम्मा मोदी सरकार के तेजतर्रार मंत्री पीयूष गोयल के पास है. वैसे तो वे स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री ही हैं, लेकिन इस सरकार में उनकी हैसियत कई कैबिनेट मंत्रियों से भी ज्यादा है. पीयूष गोयल के पास इसके अलावा ऊर्जा, कोयला और खनन मंत्रालय का भी जिम्मा है, लेकिन इन तीन सालों में सबसे अच्छा प्रदर्शन नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का रहा है. सौर ऊर्जा से बनने वाली जिस बिजली की संभावनाओं को उसकी ऊंची कीमत के आधार पर खारिज किया जाता था, वह आज कोयले से बनने वाली बिजली से भी कम कीमत पर बिक रही है. सौर ऊर्जा से पैदा होने वाली बिजली की कीमत प्रति यूनिट 2.5 रुपये से भी नीचे पहुंच गई है.
जाहिर सी बात है कि इसमें तकनीक के स्तर पर हो रहे बदलावों का भी प्रभाव है लेकिन इस मंत्रालय ने भी इस दिशा में काफी कुछ किया है. देश के कई हिस्सों में सौर बिजली संयंत्रों पर काम चल रहा है. इनमें इस्तेमाल होने वाली सौर प्लेटों यानी सोलर पैनलों के भारत में निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए इस मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं. इस वजह से भारत को विश्व व्यापार संगठन में अमेरिकी विरोध का भी सामना करना पड़ा. मंत्रालय ने सौर ऊर्जा को ग्रिड से जोड़े जाने को भी आसान बनाया है. इस क्षेत्र में इस मंत्रालय का अच्छा काम ही है जिसकी वजह से 2022 तक एक लाख मेगावाॅट सौर बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. अभी भारत में 12,288 मेगावाॅट सौर बिजली का उत्पादन होता है.
हालांकि, पवन ऊर्जा के क्षेत्र में यह मंत्रालय उतना अधिक जोर देता नहीं दिख रहा जितना सौर ऊर्जा पर दे रहा है. अभी तकरीबन 32,000 मेगावाॅट बिजली पवन ऊर्जा से बनती है. इसे 2022 तक 60,000 मेगावाॅट पर ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.
सड़क परिवहन, राजमार्ग और पोत परिवहन मंत्रालय
नितिन गडकरी की अगुवाई वाले इन मंत्रालयों का कामकाज भी इन तीन साल में काफी अच्छा रहा है. मोदी सरकार बनने के पहले सड़क परिवहन एवं राजमार्ग अलग मंत्रालय था और पोत परिवहन अलग. लेकिन इस सरकार में ये दोनों मंत्रालय एक ही मंत्री के अधीन काम कर रहे हैं.
अब तक के तीन साल में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने हर साल औसतन 11,000 किलोमीटर नए राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की मंजूरी दी है. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कार्यकाल में यह औसत तकरीबन 5,000 किलोमीटर का था. कुछ समय पहले नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में यह दावा किया कि राजमार्गों के बनने की गति का आंकड़ा अब रोज 21 किलोमीटर पर पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि वे आने वाले दिनों में इसे 30 किलोमीटर प्रति दिन पर ले जाना चाहते हैं. इस मंत्रालय ने अब तक के सरकार के कार्यकाल में तकरीबन हर महीने किसी न किसी बड़ी राजमार्ग परियोजना को मंजूरी दी है. हरित राजमार्ग परियोजना के तहत कुल परियोजना लागत के एक फीसदी से राजमार्गों के दोनों तरफ हरित पट्टी विकसित करने की योजना भी इस मंत्रालय का एक अहम कदम है.
इसी तरह से पोत परिवहन मंत्रालय ने महत्वाकांक्षी सागरमाला परियोजना शुरू की है. इसके तहत बंदरगाहों पर आधारित विकास को गति देने की कोशिश हो रही है. तीन साल के कार्यकाल में बंदरगाहों का तकरीबन 35 फीसदी क्षमता विस्तार हुआ और इस दिशा में लगातार यह मंत्रालय काम कर रहा है. पिछले दिनों कांदला पोर्ट की क्षमता विस्तार के काम की शुरुआत खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की. राजमार्गों और बंदरगाहों का काम ऐसा है कि इससे अर्थव्यवस्था के कई दूसरे क्षेत्रों में तेजी आती है. इन दोनों क्षेत्र में काम होने से स्टील, सीमेंट, श्रम जैसे कई क्षेत्रों में मांग बढ़ती है और अर्थव्यवस्था का पहिया ठीक से घूमता रहता है. इस नाते भी इन मंत्रालयों के काम को अच्छा कहा जा सकता है.
शहरी विकास मंत्रालय
मोदी सरकार में शहरी विकास मंत्रालय की सबसे बड़ी पहल के तौर पर स्मार्ट सिटी परियोजना को देखा जाता है. इसके तहत पूरे देश में 100 स्मार्ट सिटी विकसित की जानी हैं. हालांकि अगर इस परियोजना से जुड़े विभिन्न प्रावधानों और शर्तों को बारीकी से देखा जाए तो पता चलता है कि इस परियोजना को बहुत बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जाता है. लेकिन इस सबके बीच इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि कम से कम 100 शहरों में बुनियादी ढांचा दुरुस्त करने का काम कुछ कदम ही सही लेकिन आगे बढ़ेगा.
इस परियोजना की दूसरी सबसे बड़ी अहमियत यह है कि जैसे राजमार्ग और बंदरगाहों के विकास से अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों को मदद मिल रही है, वैसे ही स्मार्ट सिटी परियोजना से भी मिल रही है. कुल मिलाकर कहा जाए तो इस परियोजना से शहरों का विकास तो होगा ही, साथ ही साथ अर्थव्यवस्था की सेहत को बनाए रखने में भी मदद मिलेगी.
इस मंत्रालय की इससे भी बड़ी उपलब्धि रही है रियल एस्टेट नियमन कानून बनाना. यह कानून आज के शहरी भारत की उस अहम समस्या से जुड़ा हुआ है जिसके लिए कोई कानून ही नहीं था. तेजी से बढ़ते शहरीकरण की वजह से बड़ी संख्या में लोग बड़े शहरों की ओर आ रहे हैं और रहने के लिए फ्लैट या कारोबार करने के लिए दुकान खरीद रहे हैं. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में ग्राहकों की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि पैसा देने के बावजूद उन्हें वक्त पर प्राॅपर्टी नहीं मिल रही. नया कानून इस समस्या और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़ी अन्य समस्याओं को दूर करने की दिशा में बेहद अहम कदम है. अगर यह ठीक से लागू होता है तो इससे न सिर्फ प्राॅपर्टी खरीदने वाले आम लोगों का काफी भला होगा बल्कि इस क्षेत्र में तेजी आने का सकारात्मक असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
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