पिछले कुछ समय से कयास लगाए जा रहे थे कि राष्ट्रपति चुनाव, उपराष्ट्रपति चुनाव और संसद का मॉनसून सत्र निपटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे. अब जो सूचना मिल रही है, उसके हिसाब से यह पक्का माना जा रहा है कि अब किसी भी पल मंत्रिमंडल विस्तार की सूचना सार्वजनिक हो सकती है. गुरुवार देर रात छह मंत्रियों ने इस्तीफे दे दिए हैं. खबरों के मुताबिक इनमें उमा भारती, कलराज मिश्र, संजीव बालियान, महेंद्रनाथ पांडेय, राजीव प्रताप रूडी और निर्मला सीतारमण शामिल हैं. बताया जाता है कि इस्तीफा देने से पहले ये सभी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिले थे. कुछ और मंत्रियों से भी इस्तीफे मांगे गए हैं.

सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल विस्तार की पहल अब तक हो गई होती, लेकिन संसद का मॉनसून सत्र खत्म होते ही स्वतंत्रता दिवस पड़ गया. इस वजह से संसद सत्र के तुरंत बाद मंत्रिमंडल विस्तार नहीं हो पाया. लेकिन अब यह काम बहुत जल्दी हो सकता है. जेडीयू के औपचारिक रूप से एनडीए में शामिल होने और एआईएडीएमके के दोनों धड़ों के विलय के बाद यह संभावना और प्रबल हो गई है.

Advertisement

अतिरिक्त प्रभार का भार

प्रधानमंत्री को इस बार मंत्रिमंडल विस्तार की जरूरत राजनीतिक और प्रशासनिक, दोनों लिहाज से है. व्यावहारिक तौर पर कहा जाए तो केंद्र सरकार के कई मंत्रालय खाली हैं. तकनीकी तौर पर देखें तो इनका अतिरिक्त प्रभार किसी न किसी मंत्री के पास है. मनोहर पर्रिकर के फिर से गोवा का मुख्यमंत्री बन जाने के बाद रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास है. चीन के साथ चल रहे विवाद, पाकिस्तान से अक्सर बनी रहने वाली तनातनी और रक्षा क्षेत्र को लेकर सीएजी की कई प्रतिकूल रिपोर्टों के बाद पैदा हुई स्थिति में एक पूर्णकालिक रक्षा मंत्री नहीं होने की कमी बहुत लोगों को खली. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने की वजह से जेटली की व्यस्तता वित्त मंत्रालय के कामकाज में अधिक बताई जा रही है. ऐसे में रक्षा मंत्रालय का काम ठीक से नहीं चल पा रहा है.

अनिल माधव दवे के निधन के बाद पर्यावरण मंत्रालय हर्षवर्धन संभाल रहे हैं. उनके पास पहले से विज्ञान प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय हैं. कई अहम विकास परियोजनाओं में पर्यावरणीय मंजूरी की अनिवार्यता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलने वाली पर्यावरण कूटनीति को देखते हुए एक पूर्णकालिक पर्यावरण मंत्री के बगैर ठीक से काम चलता नहीं दिख रहा. इसी तरह वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति बन जाने की वजह से शहरी विकास मंत्रालय और सूचना प्रसारण मंत्रालय का प्रभार भी दूसरे मंत्रियों के पास है. सूचना प्रसारण मंत्रालय भी अहम है, लेकिन शहरी विकास मंत्रालय पर तो नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी परियोजना स्मार्ट सिटी के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी है. ऐसे में इसे भी प्रभारी मंत्री के जरिए चलाना मुश्किल है.

Advertisement

वैसे भी यह मोदी सरकार कार्यकाल का आखिरी मंत्रिमंडल विस्तार है और सरकार के पास ठीक से काम करने के लिए तकरीबन साल भर से थोड़ा ही अधिक का वक्त बचा है. कोई भी सरकार अपने आखिरी छह महीने में तो चुनावों की तैयारियों में ही लगी रहती है. इस नाते भी प्रधानमंत्री मोदी को अपनी टीम मजबूत करने की जरूरत है ताकि सरकारी योजनाएं उस स्तर तक पहुंच सकें जहां से मतदाताओं को अपने पाले में लाने में आसानी हो.

कौन-कौन से नाम?

अब सवाल यह उठता है कि संभावित फेरबदल में किन लोगों को शामिल किए जाने या किन लोगों को हटाए जाने की चर्चाएं चल रही हैं. पांच जुलाई, 2016 को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में प्रकाश जावड़ेकर को स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री से प्रमोट करके कैबिनेट मंत्री बना दिया गया था. इससे उस वक्त कुछ स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों में असंतोष की बात सुनी गई थी. ऐसे में संभव है कि पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, मुख्तार अब्बास नकवी और मनोज सिन्हा को कैबिनेट मंत्री बना दिया जाए. इनमें भी पीयूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान तो इस सरकार के स्टार परफाॅर्मरों में शुमार होते हैं.

Advertisement

वहीं मनोज सिन्हा के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में पिछड़ने के बाद से लगातार यह माना जा रहा है कि इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है. चार-पांच दिनों पहले जिन नई ट्रेनों की घोषणा हुई, उनमें सबसे बड़ी संख्या मनोज सिन्हा के संसदीय क्षेत्र गाजीपुर से चलने वाली ट्रेनों की है. उनके बारे में चर्चा रही है कि पिछले मंत्रिमंडल विस्तार में भले ही उन्हें संचार मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दे दिया गया लेकिन, उन्होंने रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री बने रहने की इच्छा जताई थी. इसकी वजह यह बताई गई कि वे गाजीपुर की कुछ रेल परियोजनाओं को पूरा कराना चाह रहे थे. पिछले दिनों गाजीपुर से नई ट्रेनों की शुरुआत कराने को कुछ लोग उनके रेल मंत्रालय से राज्य मंत्री के तौर पर विदा होने के संकेत के तौर पर भी देख रहे हैं. क्योंकि यह मानना अधिकांश लोगों के लिए मुश्किल है कि सुरेश प्रभु को हटाकर उन्हें रेलवे में ही कैबिनेट मंत्री बना दिया जाएगा.

जिन मंत्रियों को टीम मोदी से हटाए जाने की चर्चा है उनमें सबसे पहला नाम कलराज मिश्र का लिया जा रहा है. कलराज मिश्र भी उन मंत्रियों में शामिल बताए जा रहे हैं जिन्होंने इस्तीफा दे दिया है. कहा जाता है कि पिछले मंत्रिमंडल विस्तार में उनकी कुर्सी इसलिए बच गई थी कि कुछ ही महीने बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले थे. उन्हें मंत्रिमंडल से हटाए जाने की एक वजह यह भी बताई जा रही है कि उनकी उम्र 75 साल से अधिक हो गई है. मोदी सरकार में 75 साल की उम्र सीमा अघोषित सेवानिवृत्ति की आयु बन गई है.

लेकिन उन्हें हटाने में एक बड़ा पेंच यह है कि योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाए जाने से प्रदेश के ब्राह्मण वर्ग में नाराजगी बताई जा रही है. ऐसे में अगर कलराज मिश्र हटते हैं तो नरेंद्र मोदी को अपनी टीम में उत्तर प्रदेश के किसी ब्राह्मण नेता को जगह देनी होगी या उसका प्रमोशन करना होगा. पहले कयास लग रहे थे कि मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय को प्रमोशन मिल सकता है. लेकिन अब उन्हें उत्तर प्रदेश भाजपा का मुखिया बना दिया गया है. ऐसे ही कृषि मंत्री राधामोहन सिंह को हटाए जाने को लेकर भी चर्चाएं हैं. पिछली बार भी ऐसी चर्चाएं थीं, लेकिन उनकी कुर्सी बच गई थी.

Advertisement

मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले नेताओं में पार्टी महासचिव राम माधव और भूपेंद्र यादव के नामों को लेकर भी चर्चाएं हैं. इसी तरह अनुराग ठाकुर का नाम भी चल रहा है. जिस तरह से पूर्वोत्तर पर इस सरकार और भाजपा का जोर है, उसे देखते हुए यह भी कहा जा रहा है कि भारत के इस इलाके के कुछ चेहरों को भी मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए मोदी सरकार में जगह दी जा सकती है. भाजपा के नए सहयोगी जनता दल यूनाइटेड को भी इसमें जगह मिलेगी, ऐसी चर्चा भी चल रही है. माना जा रहा है कि जदयू को एक कैबिनेट मंत्री का पद और एक राज्य मंत्री का पद मिल सकता है. जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव की बगावत के बाद कैबिनेट मंत्री के लिए पार्टी की ओर से आरसीपी सिंह का नाम सबसे आगे चल रहा है. एनसीपी के भाजपा के साथ आने की चर्चाओं के बीच शरद पवार को भी कोई बड़ा मंत्रालय मिलने के कयास लग रहे हैं.

चौंकाने वाले नाम भी हो सकते हैं

हालांकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की अब तक की जो कार्यशैली रही है उसे देखते हुए पक्के तौर पर किसी नाम पर अंतिम तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता. भारत के संविधान के अनुच्छेद-75 के मुताबिक यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है कि वह अपना मंत्रिमंडल चुने. लेकिन आम तौर पर सत्ताधारी पार्टी में राजनीतिक जरूरतों के हिसाब से मंत्रिमंडल के स्वरूप को लेकर चर्चाएं होना आम है. मोदी सरकार के बारे में यह कहा जाता है कि यहां किसी को मंत्री बनाने या नहीं बनाने का फैसला खुद प्रधानमंत्री लेते हैं और जरूरत पड़ने पर उनकी चर्चा सिर्फ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से होती है. ऐसे में किसी भी नाम को लेकर पक्के तौर पर कुछ कहना बेहद मुश्किल काम है. संभव है कि मंत्रिमंडल विस्तार में कुछ चौंकाने वाले नाम भी सामने आएं.

Advertisement

आने वाले दिनों में कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन राज्यों के सियासी समीकरणों को साधने और भाजपा की चुनावी संभावनाओं को मजबूती देने का काम भी कर सकते हैं. इस साल हिमाचल प्रदेश और प्रधानमंत्री के गृह राज्य गुजरात में चुनाव होने हैं. संभव है कि गुजरात के एक-दो मंत्रियों का प्रमोशन हो. ऐसे ही हिमाचल प्रदेश से अनुराग ठाकुर को भी केंद्र सरकार में लाया जा सकता है. अगले साल राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी चुनाव होने हैं. ऐसे में इन राज्यों का प्रतिनिधित्व भी केंद्र सरकार में बढ़ सकता है.

2019 में लोकसभा चुनावों के साथ ही ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें भाजपा को ओडिशा में सबसे अधिक और तेलंगाना में ठीक-ठाक संभावनाएं दिख रही हैं. इसलिए संभव है कि इस मंत्रिमंडल विस्तार में धर्मेंद्र प्रधान को कैबिनेट मंत्री बना दिया जाए. ऐसे ही तेलंगाना से भी किसी ऐसे नेता को मोदी सरकार में जगह दी जा सकती है जो राज्य में भाजपा के पक्ष में माहौल बना सके.