फेसबुक से डेटा चोरी होने के मामले में फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने आखिरकार अपनी गलती मान ली है. इस विवाद पर बीते चार दिनों से चुप्पी साधे रहे मार्क जुकरबर्ग ने अब कुछ जरूरी कदम उठाए जाने की भी बात कही. जुकरबर्ग ने कहा यूजर्स के डेटा की सुरक्षा करना फेसबुक की जिम्मेदारी है और अगर वह इसमें असफल होता है तो कंपनी को यूजर्स की सेवा करने का अधिकार नहीं है.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जुकरबर्ग ने कहा, ‘मैं यह समझने की कोशिश कर रहा हूं कि आखिर यह कैसे हुआ. इसके अलावा हम यह सुनिश्चित करने की भी कोशिश करेंगे कि ऐसा फिर न हो.’ मार्क जुकरबर्ग ने कहा है कि ऐसी स्थिति न आए, इसके लिए सबसे जरूरी कदम उठा लिए गए हैं. फेसबुक के सीईओ ने यह भी माना कि अभी कंपनी को काफी कुछ करने की जरूरत है.

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इससे पहले भारत ने मार्क जुकरबर्ग को सख्त चेतावनी दी थी. बुधवार को केंद्रीय सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘मिस्टर जुकरबर्ग आप भारत के आईटी मंत्री के विचार को अच्छी तरह से जानते हैं. अगर फेसबुक के जरिए भारतीयों की किसी भी सूचना की चोरी हुई तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.’ रविशंकर ने कहा कि भारत सरकार आईटी कानून के तहत उन्हें भी समन भेज सकती है.

बीते शुक्रवार को खबर आई थी कि लंदन स्थित कैंब्रिज एनालिटिका नाम की कंपनी ने फेसबुक यूजर्स के डेटा की चोरी की है. यह कंपनी 2016 में अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को अपनी सेवाएं दे चुकी है. इस मामले में डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी एक फर्म भी शामिल है जो उनके लिए डेटा खोजने और उसका विश्लेषण करने का काम करती है. खबर के मुताबिक शायद चुनाव को प्रभावित करने के मकसद से कैंब्रिज एनालिटिका ने पांच करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा अनुचित ढंग से हासिल किया था.

उधर, जिस एप के जरिए डेटा चोरी किया गया उसे बनाने वाले एलेक्जेंडर कोगान ने कहा है कि उन्हे कोई जानकारी नहीं थी कि इसका इस्तेमाल डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में किया जाएगा. एलेक्जेंडर ने कहा कि फेसबुक और कैंब्रिज एनालिटिका दोनों ने इस मामले में उन्हें दोषी ठहराने की कोशिश की. उनके मुताबिक कंपनी ने उन्हें विश्वास दिलाया था कि वे जो भी कर रहे हैं वह कानूनी रूप से सही है.