तमिलनाडु के तूतिकोरिन की तरह गुजरात के भावनगर में भी राज्य सरकार और ग्रामीणों के बीच हिंसक संघर्ष सामने आ सकता है. किसान नेताओं ने गुजरात पॉवर कार्पोरेशन लिमिटेड (जीपीसीएल) के लिग्नाइट खनन को लेकर यह चेतावनी दी है. खबरों के मुताबिक जीपीसीएल द्वारा घोघा और भावनगर के 12 गांवों की 1,414 हेक्टेयर भूमि पर कब्जे का दावा किए जाने के खिलाफ किसानों का एक अप्रैल से विरोध प्रदर्शन जारी है.

रिपोर्ट के मुताबिक ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) के नेता अतुल अंजान ने कहा, ‘गुजरात एक ज्वालामुखी पर बैठा है. न केवल किसान बल्कि पूरा ग्रामीण गुजरात चिल्ला रहा है.’ एआईकेएस को भावनगर के प्रदर्शन में शामिल बताते हुए उन्होंने कहा, ‘सरकार को समझना चाहिए कि गुजरात में तूतिकोरिन से अलग माहौल नहीं है. अगर सरकार ने तूतिकोरिन की तरह इस मामले को निपटाने की कोशिश की तो उसे तीखे विरोध का सामना करना पड़ेगा.’

Advertisement

किसानों ने भूमि अधिग्रहण कानून का भी उल्लंघन किए जाने का आरोप लगाया है. इस बारे में एआईकेएस नेता हन्नान मुल्ला ने कहा, ‘भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013 के अनुसार अगर अधिग्रहित जमीन का पांच साल तक इस्तेमाल नहीं हो पाता है तो उसे उसके मालिकों को लौटा दिया जाएगा, इसलिए यहां भी जमीन को किसानों को लौटाया जाना चाहिए.’ उन्होंने आगे कहा कि गुजरात सहित कोई भी राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण कानून का पालन नहीं कर रही है, भावनगर के किसानों की मांग है कि उनकी जमीन उसके पास ही रहने दी जाए.

उधर, राज्य सरकार ने अपने नोटिफिकेशन में कहा है कि जीपीसीएल ने घोघा और भावनगर में 1997 में भूमि अधिग्रहण किया था लेकिन ग्रामीणों ने अब तक उस पर अपना कब्जा नहीं छोड़ा है. सरकार के मुताबिक किसानों को उनका मुआवजा दिया जा चुका है. वहीं, किसानों ने लोगों से जबरन जमीन लेने का भी आरोप लगाया है. इस बारे में किसान नेता अतुल अंजान ने कहा कि किसानों को मिला मुआवजा पर्याप्त नहीं था और इस दौरान इन जमीनों की कीमत 700 गुना तक बढ़ चुकी है. किसान नेताओं ने भाजपानीत केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़े औद्योगिक घरानों से समझौता करने और किसानों की दुर्दशा को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया.