लोकसभा चुनावों के लिए घोषणापत्र तैयार करने के लिए एक समिति के गठन की घोषणा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जनवरी में ही कर दी थी. पार्टी चुनावी घोषणापत्र को ‘संकल्प पत्र’ कहती है. केंद्रीय गृह मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह को इसका अध्यक्ष बनाया गया है. उन्हें मिलाकर इस समिति में कुल 20 सदस्य हैं. समिति के सदस्यों में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के अलावा पार्टी के और भी कई दिग्गज हैं.

भाजपा सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक घोषणा पत्र को लेकर पार्टी में जोर-शोर से तैयारी चल रही है. समिति के सदस्यों के विस्तृत सुझावों के बाद एक मसौदा तैयार भी हुआ है. हालांकि अभी यह मसौदा अंतिम तौर पर पक्का नहीं किया गया है. इस पर न सिर्फ समिति के सदस्यों की राय ली जा रही है बल्कि पार्टी के कुछ ऐसे वरिष्ठ नेता जो इस समिति के सदस्य नहीं हैं, उनसे भी सुझाव मांगे जा रहे हैं. इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक (आरएसएस) संघ के कुछ लोगों से भी इस बारे में बात हो रही है. कई राज्यों की जमीनी स्थिति के हिसाब से वहां के लिए कुछ बातों को शामिल करने के मकसद से भाजपा राज्य इकाइयों से भी सुझाव मंगाए जा रहे हैं.

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इस बार चुनाव आयोग ने यह साफ कर दिया है कि राजनीतिक दलों को चुनाव के कम से कम 48 घंटे पहले अपना घोषणापत्र जारी करना होगा. चुनाव आयोग के इस निर्देश और भाजपा के अंदर घोषणा पत्र को अंतिम रूप देने की तैयारियों को देखते हुए यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि 11 अप्रैल को पहले चरण से पांच-छह दिन पहले यानी अप्रैल के पहले हफ्ते में भाजपा अपना घोषणापत्र जारी कर सकती है.

कई स्रोतों से मिली सूचनाओं के आधार पर ऐसा लग रहा है कि भाजपा अपने घोषणापत्र में कुछ बड़े वादे करने वाली है. ऐसे में यह जानना रोचक होगा कि वे तीन प्रमुख घोषणाएं क्या हो सकती हैंः

यूनिवर्सल बेसिक इनकम

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यूनिवर्सल बेसिक इनकम यानी देश के सभी नागरिकों को न्यूनतम आय गारंटी की अवधारणा देश के सामने केंद्र सरकार ने आर्थिक समीक्षा 2016-17 के जरिए रखी थी. लेकिन इस पर बात आगे नहीं बढ़ी. वहीं दूसरी तरफ चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह घोषणा कर दी है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो ‘न्यूनतम आय गारंटी’ को लागू करेगी. कांग्रेस और पूरा विपक्ष भाजपा और नरेंद्र मोदी पर यह कहते हुए निशाना साध रहा है कि देश के आम लोगों और गरीबों के कल्याण के लिए इस सरकार में कुछ नहीं हुआ.

इस पृष्ठभूमि में यह संभावना जताई जा रही है कि भाजपा इस बार अपने चुनावी घोषणापत्र में न्यूनतम आय गारंटी जैसी कोई योजना लाने की घोषणा करेगी. पार्टी को यह भी लग रहा है कि अगर उसने ऐसी घोषणा नहीं कि तो कांग्रेस राहुल गांधी के वादे को बड़ा मुद्दा बनाकर चुनावों में भाजपा और नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश करेगी.

किसानों की आर्थिक मदद में बढ़ोतरी

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लोकसभा चुनावों को देखते हुए अंतरिम बजट में घोषित प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना को केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर, 2018 की तारीख से ही प्रभावी कर दिया था. मकसद यह था कि किसानों को तीन किस्तों में 6,000 सालाना आर्थिक मदद देने वाली इस योजना के तहत 2,000 रुपये की पहली किस्त चुनावों के पहले ही मिल जाए. कई किसानों के खाते में इस योजना के 2,000 रुपये पहुंचे भी.

लेकिन मोदी सरकार की इस योजना पर विपक्ष यह कहकर निशाना साध रहा है कि यह रकम संकट में फंसे किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है. ऐसे में भाजपा घोषणापत्र के बारे में पार्टी नेताओं से बातचीत करने पर पता चलता है कि किसानों को दी जा रही आर्थिक मदद का दायरा बढ़ाकर इसे सबके लिए करने और 6,000 रुपये की रकम को भी चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की घोषणा भाजपा के संकल्प पत्र में हो सकती है.

कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि किसानों को स्वास्थ्य या शिक्षा आदि के नाम पर भी सीधी आर्थिक मदद दिलाने का वादा भी भाजपा अपने घोषणापत्र में कर सकती है. आम तौर पर कई राज्यों में विधानसभा चुनावों में ऐसी घोषणाएं होती हैं. इस बार उम्मीद की जा रही है कि भाजपा इस शैली को लोकसभा चुनावों के लिए अपना घोषणापत्र तैयार करने में अपना सकती है.

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रोजगार सृजन पर स्पष्टता

विपक्षी दल मोदी सरकार की आलोचना जिन मोर्चों पर कर रहे हैं उनमें एक रोजगार का भी है. उनका कहना है कि सरकार के कार्यकाल में रोजगार सृजन नहीं हुआ जबकि उसने 2014 के चुनावी घोषणापत्र में इसे लेकर बड़े-बड़े वादे किए थे. उस पर यह आरोप भी लग रहा है कि रोजगार की वास्तविक स्थिति लोगों के सामने न आ जाए, इसलिए सरकार रोजगार संबंधित आंकड़ों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है.

ऐसे में यह माना जा रहा है कि भाजपा लोकसभा चुनाव 2019 के लिए रोजगार से संबंधित अधिक स्पष्ट घोषणाएं करने वाली हैं. सरकार में आने के बाद रोजगार सृजन को लेकर एक आंकड़ा देने के बजाय पार्टी इस बार यह वादा कर सकती है कि अगर उसकी सरकार बनती है तो किस क्षेत्र में कितना रोजगार सृजन होगा.

रोजगार से संबंधित पार्टी की ओर से किए जाने वाले वादों के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा अपने घोषणापत्र में स्वरोजगार के अवसरों पर भी खासा जोर दे सकती है. इसमें यह कहा जा सकता है कि अगर केंद्र में भाजपा की सरकार आती है तो मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में जिस तरह स्वरोजगार के अवसर पैदा किए गए, उसे और तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. उल्लेखनीय है कि जब रोजगार के अवसरों में कमी को लेकर सरकार पर निशाना साधा जाता है तो वह अपना बचाव यह कहते हुए करती है कि उसने विभिन्न योजनाओं के तहत करोबार करने के लिए कर्ज मुहैया कराकर स्वरोजगार के अवसर बड़े पैमाने पर पैदा किए.