बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बालिका गृह बलात्कार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को तीन महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है. हालांकि, सीबीआई ने शीर्ष अदालत से जांच पूरी करने के लिए छह महीने का समय मांगा था.

पीटीआई के मुताबिक सोमवार को शीर्ष अदालत ने सीबीआई को जांच का दायरा बढाने और इस अपराध में बाहरी लोगों की संलिप्तता की भूमिका की भी पड़ताल करने का निर्देश दिया है. साथ ही उसने जांच एजेंसी से भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के अंतर्गत अप्राकृतिक यौन हिंसा के आरोपों की जांच भी करने के लिए कहा है.

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इससे पहले बीती 6 मई को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 2 हफ्ते में मामले की जांच पूरी करने को कहा था. साथ ही अदालत ने जांच एजेंसी को मामले की स्टेटस रिपोर्ट तीन जून तक सौंपने का आदेश भी दिया था.

मुजफ्फरपुर बालिका गृह में यौन शोषण का मामला बीते साल मई में तब सामने आया था जब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने अपने ऑडिट के दौरान यहां की बच्चियों से बातचीत कर एक रिपोर्ट तैयार की थी. इसके पुलिस जांच में कई लड़कियों के गायब होने का खुलासा भी हुआ जिसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी.

बीते मार्च में सीबीआई ने एनजीओ के संचालक और मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर समेत 21 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 11 लड़कियों की हत्या की गई थी. एजेंसी के मुताबिक बृजेश ठाकुर ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया. इसके बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी 21 आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में आरोप तय करते हुए मुकदमा चलाने का आदेश दिया.