देश भर में प्याज की आसमान छूती कीमतों ने अब रिजर्व बैंक को भी परेशान करना शुरू कर दिया है. इस महीने हुई रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में प्याज का मुद्दा छाया रहा. केंद्रीय बैंक ने गुरूवार को इस बैठक का ब्यौरा प्रकाशित किया.

ब्यौरे के अनुसार रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैठक में कहा, ‘खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर में तेजी से बढ़ी और अक्टूबर में भी इसमें तेजी देखी गयी. देश के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश से खरीफ फसल को नुकसान होने के कारण सब्जियों के भाव बढ़े हैं और इसी कारण खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ी है.’

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रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर कानुनगो ने भी दास की बात दोहराते हुए कहा कि अक्टूबर और नवंबर की शुरुआत में हुई बेमौसम बारिश ने कुछ फसलों को नुकसान पहुंचाया, जिससे मंडी में इनकी आवक पर असर पड़ा है. उन्होंने कहा, ‘इसका परिणाम यह हुआ कि मांग और आपूर्ति के तात्कालिक असंतुलन से चुनिंदा सब्जियों विशेषकर प्याज की कीमतें चढ़ गयीं.’

शक्तिकांत दास ने आगे कहा कि कुल मिलाकर आर्थिक वृद्धि और खुदरा मुद्रास्फीति के परिदृश्य पर कई अनिश्चितताएं छायी हुई हैं. उनका कहना था, ‘प्याज एवं अन्य सब्जियों के भाव में तेजी के कारण पिछले तीन महीनों के दौरान खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ी है. हालांकि, यह अस्थायी हो सकती है. खरीफ की देरी से बुवाई वाली फसलों के बाजार में आने से स्थिति में क्रमिक सुधार की संभावना है.’

केंद्रीय बैंक के मुखिया के मुताबिक अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि दूरसंचार सेवाओं का शुल्क बढ़ने का खुदरा मुद्रास्फीति पर किस तरह का असर होगा.

देश भर में प्याज की कीमतें बीते सितंबर से बढ़ी हुई हैं. दिल्ली में प्याज का औसत भाव 130 से 140 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है.