निर्भया के दोषियों की फांसी पर रोक के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है. उसने अपने फैसले में कहा कि चारों दोषियों के खिलाफ अलग-अलग डेथ वारंट जारी नहीं किया जा सकता. उसका कहना था कि इन्हें एक साथ ही फांसी होगी. अदालत ने यह भी कहा कि चारों दोषी अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल एक हफ्ते के भीतर कर लें और इसके बाद उनके डेथ वॉरंट पर तामील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए.

दिल्ली हाईकोर्ट ने इससे पहले चारों दोषियों की फांसी पर रोक लगा दी थी. केंद्र ने इस फैसले को चुनौती दी थी. उसका कहना था कि कानूनी प्रावधानों का फायदा उठाकर फांसी टालने की कोशिश की जा रही है. सरकार के मुताबिक दोषी एक एक कर कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसके कारण फांसी देने में देर हो रही है.

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इस मामले के चारों दोषियों पवन कुमार गुप्ता, विनय कुमार मिश्रा, अक्षय कुमार और मुकेश कुमार सिंह को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है. निचली अदालत ने सभी चार दोषियों को एक फरवरी को तिहाड़ जेल में सुबह छह बजे फांसी देने के लिए 17 जनवरी को मृत्यु वारंट जारी किया था. लेकिन इस बीच मामले के एक दोषी विनय ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल कर दी.

इस दया याचिका के लंबित होने के कारण अदालत को डेथ वारंट स्थगित करना पड़ा. अभियुक्तों के वकील का कहना था कि नियमों के मुताबिक जब एक अभियुक्त की अर्जी लंबित हो तो दूसरे को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है. इससे पहले सात जनवरी को अदालत ने फांसी की तारीख 22 जनवरी तय की थी. लेकिन तब भी एक दोषी की दया याचिका के कारण डेथ वारंट खारिज करना पड़ा था.

सोलह दिसंबर, 2012 की रात को दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में 23 साल की पैरामेडिकल छात्रा निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार और बर्बरता की गयी थी. सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी थी.