स्मृति शेष
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केशवानंद भारती : वह धर्मगुरु जिसकी कोशिशों से भारत एक लोकतंत्र के रूप में बचा रह सका
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प्रणब मुखर्जी : एक ऐसा प्रधानमंत्री जो भारत को मिला नहीं
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अब कौन उठाएगा आसमान की तरफ हाथ और सुनाएगा - ‘किसी के बाप का हिंदोस्तान थोड़ी है’
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सरोज खान के नृत्य निर्देशन वाले वे पांच गाने जिन्होंने माधुरी दीक्षित को डांस डीवा बनाया
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नंदकिशोर नवल: ‘शमशेर, नागार्जुन, त्रिलोचन और मुक्तिबोध जैसे कवि एक खास विचारधारा की जकड़न में थे’
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इरफ़ान यूं तो तुम अब दोनों जहान के हो, लेकिन यह बात हमेशा मायने रखेगी कि तुम राजस्थान के थे
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जब इरफान खान सबसे ज्यादा तकलीफ में थे
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इरफान: जिन्होंने साधारण को असाधारण बनाया
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कभी दुनिया के बड़े गणितज्ञों में शुमार वशिष्ठ नारायण सिंह को उनकी मौत ही गुमनामी से निकाल सकी
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‘संकटमोचक’ अरुण जेटली की कमी भाजपा को कहां-कहां महसूस हो सकती है?
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ख़य्याम : जिनकी सारी फिल्में मील का पत्थर बनीं
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मनोहर पर्रिकर की सादगी दिल्ली के कई बुद्धिजीवियों की तरह करीने से ओढ़ी-बिछाई नहीं बल्कि सहज थी
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नामवर सिंह चलती-फिरती विद्यापीठ थे
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नामवर सिंह की विद्वत्ता गहरी थी, पर वह कभी उन पर या दूसरों पर बोझ नहीं बनी
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कैसे अनंत कुमार के रूप में मोदी सरकार ने अपना एक बड़ा ‘संकटमोचक’ भी खो दिया है
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यह शोक शक्ति में बदले, यही शमशेर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी
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विष्णु खरे ने किसी को भी नहीं बख़्शा, न कविता में और न जीवन में
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विष्णु खरे जीवन को कविता की तरह देखते थे और कविता को कहानी की तरह कहते थे
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वीएस नायपॉल : भारतीय मूल का वह लेखक जिसे भारत ने कभी अपना नहीं माना
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फिल्मों की तरह राजनीति की पटकथा लिखना भी करुणानिधि बखूबी जानते थे
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शुजात बुखारी कश्मीर में नौजवानों और बुजुर्गों, उग्रवादियों और उदारवादियों के बीच का पुल थे
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संतों पर अविश्वास के इस दौर में कुछ तो था भय्यूजी महाराज में जो थोड़ा ढांढस बंधाता था
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कौन हैं वे लोग, जिन्होंने शुजात बुखारी की जान ली है?
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राम कुमार की कला ने मौन को महाकाव्यात्मक आयाम दिए थे
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हॉकिंग ने सच कहा था, ये दुनिया, ऐसी नहीं होती अगर इसमें वे लोग न होते जिन्हें आप प्यार करते हैं
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फैशन टीवी पर बैन लगाने वाले प्रियरंजन दासमुंशी कभी समाचार चैनलों पर भी नकेल कसने वाले थे
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'विनोद, तुम इकलौते संबुद्ध अभिनेता थे'
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किशोरी अमोनकर : 'ताई' जो ज्ञान का अनादर होते देख शेरनी हो जाती थीं
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...इसलिए 20वीं सदी को 21वीं सदी की दूसरी दहाई तक खींच लाने वाले कास्त्रो का जाना उदास करता है
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हाशिम अंसारी: अयोध्या विवाद का सबसे पुराना पक्षकार जिसने कभी इस पर राजनीति नहीं की
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मार्टिन क्रो : जिनकी बल्लेबाजी में किसी कविता सरीखा आनंद था